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चाहिए महादेव का आर्शीवाद तो शिव पुराण के पाठ में कभी न करें ये गलतियां!

चाहिए महादेव का आर्शीवाद तो शिव पुराण के पाठ में कभी न करें ये गलतियां!

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शिव पुराण का पाठ हर सोमवार को करना चाहिए. सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है. कहते हैं कि शिव पुराण का साप्ताहिक पाठ करने से भोलेनाथ की कृपा तो होती ही है, व्यक्ति अधर्म का मार्ग छोड़ देता है. धर्म के रास्ते का अनुसरण करने लगता है. जो भी जातक सच्चे मन से प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा करते हैं और शिव पुराण का पाठ करते हैं तो भोलेनाथ उसकी राह में आई हर बाधा को दूर करते हैं.

शिव पुराण में महादेव के रहस्य

भगवान शंकर को जितना भी मन का भोला कहा जाता है, उनके जीवन से जुड़े रहस्य एवं कथाएं उतने ही गूढ़ माने जाते हैं. भगवान शिव पर न जाने कितने शोध हुए लेकिन आज तक उनके रहस्यों को कोई भी पूरी तरह से नहीं जान सका है. यह भी उनकी महिमा ही है. वैसे तो सनातन धर्म में भगवान शंकर से संबंधित अनेकों ग्रंथ मौजूद हैं, जिनमें उनकी कई कथाएं उपलब्ध है लेकिन शिव पुराण में भगवान शंकर की उत्पत्ति, विवाह, जीवन चरित्र, जीवन जीने की कला के साथ साथ विस्तार से उनके संपूर्ण जीवन का रहस्योद्घाटन किया गया है.

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शिव पुराण पढ़ने , सुनने से लाभ

शैव मत से संबंधित शिव पुराण में भगवान शंकर के जीवन की विस्तार से चर्चा की गई है. हिंदू धर्म में ऐसी आस्था है कि शिवपुराण को सुनने और पढ़ने से अक्षण पुण्य की प्राप्ति होती है. परिवार में एकता होती है, कारोबार में तरक्की होती है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है. इसके साथ ही अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है.

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लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि संपूर्ण फल प्राप्ति के लिए शिव पुराण के कुछ नियमों का पालन करना चाहिए. बिना नियम का पालन किए पाठ करने या सुनने से मनोवांछित फल की प्राप्ति नहीं हो सकेगी. भगवान भोलेनाथ सचमुच दिल के भोले होते हैं. इनकी आराधना में बहुत ज्यादा औपचारिकताओं की आवश्यक्ता नहीं होती, फिर भी थोड़ी बहुत सावधानियां बरतनी जरुरी है, इसलिए आज हम विस्तारपूर्वक शिवपुराण के पाठ करने और सुनने के नियमों की चर्चा करेंगे.

  • सबसे पहले तो मन में श्रद्धा भाव को लाएं. किसी भी पूजा पाठ या अनुष्ठान का फल तभी मिलता है जब इष्ट के प्रति हृदय में सच्चा भाव हो. शिव पुराण पाठ सुनने और सुनाने के पहले भगवान शिव कें प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था का विस्तार करें.
  • तन स्वच्छ हो तो मन भी स्वच्छ हो जाता है. कथा सुनने या करने से पूर्व शरीर को पूरी तरह से स्वच्छ बनाएं. बाल, नाखून आदि को काटें. पूरी तरह शुद्ध होकर ही पाठ की शुरुआत करें.
  • पाठ के क्रम में ब्रह्मर्च व्रत का पालन करें. किसी भी परायी स्त्री या पुरुष को देखकर उसके प्रति मन में कोई बुरा भाव न लाएं. कथा के दौरान उपवास रखना चाहिए. संभव हो सके तो पाठ के दौरान जमीन पर ही सोना चाहिए.
  • मन में किसी के प्रति बुरा भाव न रखें. निंदा, चुगली, ईर्ष्या, क्रोध आदि न करें अन्यथा पाठ के पुण्य समाप्त हो जाते हैं.
    पूर्ण रुप से तामसिक भोजन का त्याग करें. सात्विक भोजन ही ग्रहण करें. मिर्च, मसाले, प्याज, लहसून और पचने में भारी बासी भोजन न करें. किसी भी तरह के नशीले एवं मादक पदार्थों के सेवन से परहेज करें. अगर स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां न हो तो जौ, तिल एवं चावल से बनें भोज्य पदार्थों का सेवन करें.
  • कथा पूरी होने के बाद शिव पुराण एवं शिव परिवार का विधि विधान से पूजन करें.
  • शिव पुराण की कथा सुनने से पहले या बाद कोई भी जातक अगर गौ, गरीब, अनाथ, विधवा आदि का दिल दुखाता है, वो पाप का भागी बनता है. इससे उसे पाठ का फल तो नहीं मिलता है साथ ही उसके संपूर्ण सत्कर्मों का भी विनाश हो जाता है.
  • अगर आप अपने घर पर भगवान शिव का पूजन कर रहे हैं तो पाठ शुरु करने के पूर्व तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, दक्षिणा, पान, पंचामृत, नारियल, चंदन, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, धतूरा, अकुआ के फूल, बिल्व पत्र, जनेउ, फल, मिष्ठान्न, अष्टगंध, भगवान को अर्पण करने वाले वस्त्र आदि एक जगह इकट्ठा कर किसी आसन या चौकी पर रख देना चाहिए. इससे आपकी पूजा प्रभावित नहीं होगी क्योंकि सामग्री जुटाने के लिए आपको बार बार उठना नहीं होगा. बार बार उठने से पूजा की एकाग्रता भंग होती है और पाठ का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है.

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