Religion

हमेशा रखें ध्यान : इन पूजा सामग्रियों को रखा जमीन पर तो नहीं प्राप्त होगा मनोवांछित फल

घर के मंदिर में कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं! जानिये कौनसी

पूजन सामग्री

सुखमय एवं शांतिमय जीवन के लिए पूजा पाठ बेहद जरुरी होता है. हम चाहें शिव को मानें, गणपति को माने, विष्णु को माने या फिर देवी दुर्गा को. सच्ची निष्ठा एवं श्रद्धा से उनका पूजन करने पर अपने मनोवांछित फल प्राप्त होता है. फिर भी कभी कभार हमारे मन में यह शंका हो जाती है कि मुझे अमुक पूजा या अनुष्ठान का फल प्राप्त नहीं हुआ. कई बार जानकारी का अभाव होने की वजह से हमारे पूजा पाठ में कमी रह जाती है, जिस वजह से फल प्राप्त नहीं हो पता है. हम श्ऱद्धा भाव से अपने आराध्य का अनुष्ठान करते हैं लेकिन अज्ञानतावश विधि विधान में चूक कर देते हैं.

पूजन सामग्री

जमीन पर पूजन सामग्री रखना सही नहीं

जीवन यापन से लेकर भोजन तक के लिए नियम कानून बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है, ठीक उसी प्रकार भगवान की पूजा के लिए भी नियम बनाए गए हैं. हमें उसके अनुसार ही अपने अनुष्ठान और पूजा पाठ करना चाहिए. पुराणों में भी कहा गया है कि हर वस्तु विशेष का अपना एक निश्चित स्थान होता है. सही स्थान पर वस्तु होने से उसका अच्छा प्रभाव पड़ता है और प्रतिकूल स्थान पर होने की वजह से दुष्प्रभाव पड़ना तय होता है. शास्त्रों के नियमों की अनदेखी करने से घर, परिवार एवं व्यवसाय में दरिद्रता का वास हो जाता है.

हमेशा याद रखें की पूजन सामग्री का स्थान जमीन पर नहीं होता है. अगर आप भगवान की भक्ति का समुचित फल प्राप्त करना चाहते हैं तो इस आलेख को अवश्य पढ़ें. इसमें हम चर्चा करने जा रहे हैं कि ब्रह्मवैवर्तपुराण में वर्णित निपमों के अनुसार कौन कौन सी पूजन सामग्री को जमीन पर नहीं रखना चाहिए. बताते चलें कि ब्रह्मवैवर्तपुराण वैष्णव पुराण है.

पूजन सामग्री

दीपक

पूजन के दौरान दीपक को कभी भी जमीन पर न रखें. दीपक के नीचे चावल रखने या लकड़ी पर रखने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है.

सुपारी

पूजा करते वक्त लोग सुपारी को जमीन पर रख देते हैं. ऐसा करने से परहेज करना चाहिए. नियमों के अनुसार सुपारी को सिक्के के उपर रखना चाहिए.

शालिग्राम

किसी भी अनुष्ठान के दौरान शालिग्राम को जमीन पर नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे किसी साफ सुथरे रेशमी कपड़े को बिछाकर उसके उपर रखना चाहिए.

रत्न या मणि

कई बार पूजा के दौरान किसी रत्न या मणि को भी रखा जाता है. इसे भी जमीन पर नहीं रख कर किसी स्वच्छ कपड़े के उपर रख देना चाहिए. अगर रत्न या मणि को लाल कपड़े के उपर रखा जाए तो और बेहतर होगा.

देवी देवताओं की मूर्तियां

Radha_Krishnaसबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भूलकर भी देवी देवताओं की प्रतिमाओं को फर्श पर नहीं रखना चाहिए. आपने देखा होगा कि सार्वजनिक स्थानों पर भी विशालकाय देवी प्रतिमाओं को भी चौकी के उपर ही प्रतिष्ठित किया जाता है. घर में पूजा पाठ के दौरान छोटी मूर्तियों को अपनी श्रद्धा और शक्ति के अनुसार लकड़ी या सोने चांदी के सिंहासन पर स्थापित करना चाहिए. अगर आप चाहें तो लकड़ी के बाजोट पर भी मूर्ति स्थापित कर सकते हैं. अंगूठे से बड़े आकार का शिवलिंग न रखें. मंदिर में हमेशा बैठे हुए हनुमान जी की मूर्ति रखें. अगर आप घर के मंदिर में शिवलिंग रख रहे हैं तो उसका आकार अंगूठे से बड़े न हो. हनुमान जी की मूर्ति में हनुमान जी हमेशा बैठे हुए हो. मंदिर में शनि देव और भैरव बाबा की तस्वीर ना रखें

यज्ञोपवित

यज्ञोपवित यानी जनेऊ को कभी भी जमीन पर न रखें. ये मुख्य रुप से भगवान को अर्पित किया जाता है. जमीन पर रखने से जनेऊ गंदा भी हो सकता है. पूजा करने के दौरान जनेऊ को किसी थाली में रखें.

वस्त्र और आभूषण

श्रद्धा भावना से भक्तों की ओर से भेंट किए गए वस्त्र और आभूषण भगवान को बेहद प्रिय होते हैं. भगवान को हमेशा साफ सुथरे वस्त्र ही अर्पित करने चाहिए. जमीन पर रखें वस्त्र और आभूषण गंदे हो सकते हैं, इसीलिए कभी भी आभूषण और वस्त्र को किसी थाली में रखें.

शंख

शंख की ध्वनि से देवता प्रसन्न होते हैं. पूजा के दौरान शंख को हमेशा किसी साफ कपड़े या लकड़ी के फट्टे पर रखें.

अब कभी भी पूजा करने के दौरान उपरोक्त वर्णित किसी भी सामग्री को जमीन पर रखने से परहेज करें. आपको निश्चय ही आपके पूजन का फल दिखना शुरु हो जाएगा. हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा ये आलेख अवश्य पसंद आया होगा.

घर के मंदिर में कुछ और भी विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं! जानिये और कौनसी

१) इस बात का ख्याल रखें की पूजा सामग्री में टूटे हुए चावल पूजा अर्पण ना करें। हो सके तो हल्दी में भीगे हुए चावल चढ़ाएं
२) पूजा में टूटे हुए दीये का इस्तेमाल ना करें
३) मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में रखें
४) स्वर्गवासी परिजनों की तस्वीर मंदिर में ना रखें। अगर आपको रखनी पद रही है तो उनका स्थान भगवान् की मूर्तियों से नीचे हो
५) दिव्य और सौम्य रूप वाली देवी-देवताओं की तस्वीर मंदिर में रखें

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