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यह है भारत का चमत्कारी मंदिर, यहाँ की मूर्तियाँ करती हैं आपस में बातें

जानिए क्या है मंदिर का रहस्य

हमारा भारत देश धार्मिक मान्यताओं और रीति रिवाजों से भरा देश है. यहाँ के हर गली मोहल्ले में आपको कोई न कोई मंदिर या गुरुद्वारा आवश्य ही देखने को मिलेगा. गौरतलब है कि भारत में ऐसे कईं मंदिर और इमारतें मौजूद हैं, जो अपने आप में लाखों रहस्य छिपाए हुए बैठे हैं. इन रहस्यों पर से पर्दा उठा पाना किसी के बस की बात नहीं हुई. यहाँ तक कि बड़े बड़े विज्ञानी भी चमत्कारों को देख कर भगवान की वास्तविकता का लोहा मान चुके हैं. यहाँ के हर मंदिर में आपको रोज़ाना भक्तों की लंबी भीड़ उमड़ती हुई दिखाई देगी. हर व्यक्ति कोई ना कोई मनोकामना या इच्छा की पूर्ती के लिए मंदिरों में जाता है. लेकिन आज हम आपको भारत के एक ऐसे रहस्मई मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे कुछ लोग चमत्कारी मंदिर के नाम से भी जानते हैं.

बिहार में मौजूद है ये मंदिर 

आपने अपने जीवन काल में सैंकड़ों मंदिर मस्जिद देखे होंगे जो अपने भक्तों की आस्था के कारण या उनके सुनहरी इतिहास के कारण प्रचलित हैं. लेकिन आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, उसके किस्से दूर देशों तक फैले हुए हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर की मूर्तियों अकसर आपस में बातें करती रहती हैं. यहाँ तक कि बहुत से लोग इस बात को नकारते हैं लेकिन यह एकदम सच है. यह मंदिर उत्तरप्रदेश के बिहार में मौजूद हैं. जिसकी भक्तों में पकड़ इतनी मजबूत है कि दूर दूर से लोग इसके दर्शन करने आते हैं. मंदिर में अद्भुत नक्काशी और मूर्तियों के निर्माण के कारण यह मंदिर हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है. कहते हैं कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से मंदिर में पूजा करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर

तंत्र साधना के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर बिहार में मौजदू है जिसे सभी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर के नाम से जानते हैं. इस मंदिर में राज राजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी के इलावा बंगलामुखी माता, तारा माता, बटुक भैरव, दत्तात्रेय, काल भैरव, अन्नपूर्ण भैरव और मातंगी भैरव की मूर्तियाँ स्थापित हैं. देश के सभी देवी शक्ति पीठों में बड़हिया स्थित सिद्ध मंगलापीठ मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर का अपना एक अलग ही स्थान है. बिहार में 151 फीट के इस मंदिर के बीचो बीच मिट्टी की पिंड स्वरूप माँ बाला त्रिपुर सुंदरी स्वयं बिराजमान है. इस मंदिर में जाने वाले सभी जातकों के दुःख दर्द और बाधाएं दूर हो जाती हैं. यदि कोई बड़हिया वासी अपने किसी शुभ कार्य की शुरुआत मंदिर में माँ के आशीर्वाद से करता है, तो उसके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं.

मंदिर का इतिहास

इस मंदिर की स्थापना पाल वंश में की गई थी जिसकी खोज बाद में मिथिला के दो ब्राह्मण भाईयों ने की थी. दंत कथाओं के अनुसार यह मान्यता है कि वैष्णो देवी के संस्थापक श्रीधर ओझा नामक एक महान तांत्रिक ने करीब 800 वर्ष पूर्व जम्मू कश्मीर कटरा स्थित मां वैष्णो देवी की स्थापना के बाद बड़हिया ग्राम में मां बाला त्रिपुर सुंदरी की प्राण प्रतिष्ठा मिट्टी की पिंड में की थी. इसलिए यहाँ त्रिपुर सुंदरी, महा काली, महा लक्ष्मी और महा सरस्वती चचार पिंडियों में बिराजमान है.

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