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पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की अस्थियाँ त्रिपुरा की सात नदियों में हुई विसर्जित, समर्थकों का लगा तांता

लखनऊ: भारत के सबसे चहेते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 16 अगस्त को निधन के बाद उनकी अस्थियाँ उत्तरप्रदेश की 13 अलग अलग नदियों में बहाने का फैसला लिया गया. जिसके चलते बीते शुक्रवार को अटल जी की अस्थियाँ बीजेपी मुख्यालय से रवाना की गईं. इसके लिए भाजपा मुख्यालय ने उनकी अस्थियों को 16 अलग अलग कलशों में डाल कर नेतायों को विसर्जित करने का जिम्मा सौंपा गया. इसी बीच शुक्रवार को इस मौके पर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया, विजय बहादुर पाठक, विद्या सागर सोनकर, गोविंद नारायण शुक्ला, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष दीक्षित, प्रदेश प्रवक्ता चंद्रमोहन समेत बड़ी संख्या में मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने ‘अटल जी अमर रहें’ के नारे लगाए.

Atal Bihari Vajpayee

वहीँ शनिवार को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं मंत्री महेंद्र नाथ सिंह की अगुवाई में संगम नदी में अटल जी की अस्थियाँ विसर्जित की गई. मौर्या ने अटल जी की अंतिम विदाई के समय उनके लिए कुछ पंक्तियाँ कहीं और उनकी आत्मा की शान्ति की दुआ मांगी. उन्होंने कहा कि “अटल जी अजर हैं, अमर हैं और अटल हैं.” उन्होंने कहा कि, “मैं इतना ही बता सकता हूं कि जब दोहरी सदस्यता का मुद्दा उठा था तो अटल जी ने कहा था कि मां और बेटे के बीच जो संबंध होता है, वहीं रिश्ता उनका और आरएसएस का है”.

Atal Bihari Vajpayee last rites

बीते रविवार को बिप्लब कुमार देब की अगुवाई में अटल जी की अस्थियाँ त्रिपुरा की सात नदियों में बहाई गयी . इस बीच कुमार देब ने कहा कि अटल जी जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता, उन्होंने कहा कि वह ना केवल एक अच्छे नेता बल्कि हमारे देश के लोगों की ताकत थे. आपको बता दें बीते दिनों लंबी बीमारी से लड़ते लड़ते 16 अगस्त को अटल जी ने लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर अपनी अंतिम सांसें ली.

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