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Statue of Unity: जानिए इसकी ऊंचाई, प्रवेश टिकेट और स्थान से जुडी संपूर्ण जानकारी

Statue of Unity informationकल यानि 31 अक्टूबर 2018 को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता की प्रतिमा अर्थात Statue of Unity का अनावरण किया.  परंपरागत धोती और शाल पहने हुए यह मूर्ति भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की है. दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का अनावरण करते हुए, प्रधान मंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडलर अकाउंट पर एक ट्वीट साझा किया जिसमें उन्होंने  देश के लोगों को मूर्ति समर्पित करते हुए सरदार पटेल का आभार व्यक्त किया. मोदी जी ने कहा कि सरदार पटेल एक ऐसी महान हस्ती थे, जिन्होंने इस देश को बनाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. चलिए एक नजर डालते हैं इस ट्वीट पर-

क्या है इस प्रतिमा की ऊंचाई? 

यह प्रतिमा लगभग 182 मीटर ऊंची है जिसके कारण इसे दुनिया की सबसे ऊंची पहली मूर्ति का दर्ज़ा दिया गया है. बता दें कि ऊंचाई के मामले पर चीन की बसंत बुद्ध मंदिर प्रतिमा दुसरे स्थान पर है जोकि 153 मीटर लंबी है. जबकि इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर जापान की उशिकू दाइबुत्सू है जिसकी ऊंचाई 120 मीटर है. आपको बता दें कि मशहूर स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी जोकि अमेरिका में है, वह सरदार पटेल की इस प्रतिमा की ऊँचाई से आधी ऊँचाई पर मौजूद है.

इस बीच मूर्ति के महत्व के बारे में बात करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ” मूर्ती की ऊंचाई उसके पैरों से नहीं बल्कि उसके इतिहास, राष्ट्रीय और अध्यात्मिक मूल्यों पर निर्भर करनी चाहिए. ऐसे में सरदार पटेल इन सभी मामलों में सबसे अव्वल हैं”. मोदी जी ने कहा कि यह मूर्ति आने वाले युग के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है.

कहाँ है ये मूर्ति? 

एकता की यह प्रतिमा गुजरात के साधु-बेट द्वीप में स्थित है. यह क्षेत्र के लगभग 20,000 वर्ग मीटर पर है और 12 वर्ग किमी कृत्रिम झील से घिरा हुआ है.

कौन सी नदी पर है यह प्रतिमा? 

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि Statue of Unity नर्मदा नदी के तट पर मौजूद है.  गौरतलब है कि यह नदी गुजरात के जिस द्वीप परहै, उसे  राजपिप्ला के पास नर्मदा बांध से होकर गुजरना पड़ता है.

एकता प्रतिमा परियोजना 

इस परियोजना की घोषणा 7 अक्टूबर 2010 को हुई थी. इसके लिए  गुजरात सरकार ने  सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (एसवीपीआरईटी) की स्थापना की थी.  मूर्ति के निर्माण का समर्थन करने के लिए एकता आंदोलन की प्रतिमा भी शुरू की गई थी. इसमे एक याचिका भी आयोजित की गई थी.  20 मिलियन लोगों ने मिलकर इसे दुनिया की सबसे बड़ी हस्ताक्षरित याचिका बनाया था.

इस मूर्ति के निर्माण, डिजाइन और रखरखाव के लिए साल 2014 में लार्सन एंड टुब्रो को अनुबंध दिया गया था. यह मूर्ति 2,98 9 करोड़ रुपये (यूएस $ 420 मिलियन) की कुल लागत पर बनाई गई है. इस मूर्ती को  सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल में बनाया गया था जिसमें गुजरात सरकार द्वारा अधिकांश धन राशि (करीब 2,063 करोड़ रुपये) थी.

प्रतिमा पूर्ण होने की तिथि

बता दें कि इस मूर्ति का निर्माण 31 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ और अक्टूबर 2018 के मध्य में पूरा हो गया था. लेकिन इसका अनावरण प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की जयंती पर  किया गया.

एकता की प्रतिमा के लिए प्रवेश शुल्क

प्रतिष्ठित मूर्ति देखने  के लिए आम जनता का प्रवेश 3 नवंबर 2018 से शुरू किया जा रहा है. वयस्क के लिए प्रवेश टिकट का मूल्य 120 रुपए रखा गया है जबकि 3 से 15 साल के बच्चो के लिए टिकेट का मूल्य से आधा यानि 60 रुपए है. बस सेवा के लिए आपको अतिरिक्त शुल्क के तौर पर 30 रुपये का भुगतान करना होगा.

यदि आप वयस्क हैं तो आप 350 रुपये पर अवलोकन ‘डेक व्यू ‘ के लिए टिकट प्राप्त कर सकते हैं। वही मूल्य बच्चों पर भी लागू होता है.

टिकट खरीदने के लिए यहां क्लिक करें।

ध्यान दें

  • डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से टिकट बुकिंग के लिए कोई शुल्क नहीं है.
  • यदि आप क्रेडिट कार्ड द्वारा भुगतान करते हैं तो कुल राशि पर 1% प्लस जीएसटी शुल्क लिया जाएगा.

यहां क्लिक करके आप Google Maps पर  प्रतिमा की लोकेशन खोज सकते हैं.

मूर्ति के लिए मोदी जी ने एक आधिकारिक वेबसाइट तैयार करवाई है जहां आप मूल जानकारी पा सकते हैं, टिकट खरीद सकते हैं, और घटनाएं देख सकते हैं आदि. आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें.

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