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जिंदगी में परेशानियां देती हैं संकेत कुंडली में पितृदोष का ! आइए जानें कुछ सरल उपाय जिनसे आप धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश जैसी परेशानियां कर सकते हैं दूर!

धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश जैसी परेशानियां करती हैं संकेत कुंडली में पितृदोष ! आइये जानें कुछ उपाय पितृदोष से मुक्ति पाने के !

कुंडली में पितृदोषहम अपने जीवन में अक्सर यह महसूस करते हैं कि कोई भी काम कड़ी मेहनत और मशक्तकत से कर रहे हैं. दिल से कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसका परिणाम नहीं मिलता. हमेशा किसी न किसी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. कितना भी पैसा कमा लें, लेकिन धन की कमी बनीं रहती है. धन की हानि होती रहती है. शादी में बाधाएं आती है. परिवार के सदस्यों में आपस में द्वेष की भावना बढ़ती जाती है. परिवार में दिन रात कलह का माहौल रहता है. घर में मनहूसियत छाई रहती है. कोई न कोई बीमार पड़ता रहता है. इन समस्याओं के पीछे पितृदोष होता है.

जिस जातक की कुंडली में पितृदोष होता है, उन्हें ऐसी समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ता है. अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता रहता है तो आपको पितृ शांति के उपाय अवश्य करने चाहिए अन्यथा जीवन नरक बनता चला जाता है.

क्या होता है पितृदोष?

पितृ दोष शब्द से ही आप अर्थ लगा सकते हैं पिता से जुड़ा हुआ दोष. पितृदोष के संबंध में पुराणों और ज्योतिष शास्त्र में अलग अलग व्याख्या है लेकिन एक बात पर सहमति बनती है कि जातक की कुंडली में वो दोष जो उनके पूर्वजों और कुल के लोगों के कर्म के अनुसार स्थापित हो जाता है. कभी कभी हमें लगता है कि हमारे पिताजी और उनके भी पिताजी, बेहद सात्विक प्रवृति के थें, कभी किसी का बुरा न सोचते थें और नहीं करते थें तो आखिर हमारी कुंडली में यह दोष कैसे आ गया.

सनातन धर्म में पुर्नजन्म की अवधारणा के तहत हमारे पूर्वजों के रक्त का संचार हमारे शरीर में होता है. हम अपने पिताजी और दादाजी को ही अपना पूर्वज नहीं मान सकते क्योंकि हमारे कई पूर्वज होते हैं. पिछले जन्म के पूर्वज भी हमारे पूर्वज होते हैं. हम आज यहां जन्म लेते हैं. मृत्यु के बाद कहीं और जन्म ले लेते हैं. इस प्रकार जैसे जैसे आत्मा शरीर धारण करती है, वैसे वैसे पूर्वज भी होते रहते हैं.

कुंडली में पितृदोष

पितृदोष से मुक्ति के उपाय

कुंडली में पितृदोष से सांसारिक जीवन में आने वाली बाधाओं का उल्लेख हमने पहले ही कर दिया है. प्राचीन ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष को सबसे बड़ा दोष माना गया है. इससे व्यक्ति का जीवन कष्टों से भर जाता है. यह दोष जन्म जन्मांतर तक बना रहता है, अगर इससे मुक्ति न पा लिया जाए. ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष को समाप्त करने के कुछ उपाय बताए गए हैं. इन उपायों को अपनाएं और हमेशा के लिए पितृदोष से मुक्ति पाएं.

पितरों का करें तपर्ण

जिस जातक की कुंडली में यह दोष हो, उसे पितृ पक्ष  जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है. उस दौरान उन्हें अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए. संभव हो तो किसी नदी के तट पर इस अनुष्ठान को पूरा कना चाहिए. तर्पण करने से पितृदोष की बाधा दूर होती है और शांति मिलती है.

अमावस्या और पूर्णिमा को धूप अर्पित करें

पितृदोष से मुक्ति के लिए प्रत्येक पूर्णिमा और अमावस्या के दिन पितरों को धूप अर्पित करें. गोबर के कंउे या उपले पर शुद्ध घी, गुड़ और जौ से धूप करें. अमावस्या और पूर्णिमा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें. अमावस्या और पूर्णिमा को भी पितरों का तर्पण किया जा सकता है.

हनुमान जी की करें आराधना

श्री हनुमान जी पितृदोष को दूर करने वाले सबसे बड़े देवता माने गए हैं. जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर श्री हनुमान चालीसा या अष्टक का पाठ करें. इस पाठ से आपके पितरों को शांति भी मिलती है और जीवन की तमाम बाधाएं भी दूर होती है.

शाम के वक्त दीप प्रज्जवलित करें

पितृदोष से मुक्ति के लिए शाम के समय दीप जलाना भी बेहतर उपाय है. दोपहर के समय पीपल के वृक्ष पर जल, पुष्प, अक्षत, गंगाजल, दूध, काला तिल आदि अर्पित करें और अपने सभी स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आर्शीवाद की कामना करें. नाग स्त्रोत, महामृत्युंजय मंत्र, रुद्र सूक्त, पितृ स्त्रोत और नवग्रह स्त्रोत इत्यादि का पाठ करें.

आचरण को बनाएं पवित्र व सात्विक

पितरों को अपने वंशजों का अनैतिक और अपवित्र जीवन कभी भी पसंद नहीं होता. इस वजह से भी वो कुपित हो जाते हैं, इसलिए आपने जीवन को पवित्र, नैतिक और सात्विक बनाएं रखें. अपने कर्म, मन, वचन में पवित्रता लाएं. व्याभिचार से दूर रहें. निश्चित ही आपकी कुंडली में उपस्थित पितृदोष दूर होगा.

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